बिहार के प्राथमिक विद्यालयों में इको क्लब (Eco Club for Mission LiFE) का गठन अनिवार्य है, जिसका उद्देश्य बच्चों में पर्यावरण संरक्षण, जल-ऊर्जा बचत, कचरा प्रबंधन और स्वच्छता के प्रति जागरूकता लाना है; ये क्लब पौधरोपण, रिसाइकल करने और 'मिशन लाइफ' की थीम पर आधारित गतिविधियों से छात्रों को प्रकृति से जोड़कर उनमें नेतृत्व क्षमता और जीवन कौशल विकसित करते हैं, जिससे वे जलवायु परिवर्तन से निपटने में सक्षम बनें। 



                                          विद्यालय में इको क्लब द्वारा एक पेड़ माँ के नाम का आयोजन 

इको क्लब के मुख्य उद्देश्य

  • जागरूकता बढ़ाना: पर्यावरण मुद्दों जैसे प्रदूषण, जल संरक्षण और जैव विविधता के बारे में छात्रों को शिक्षित करना।
  • स्थायी आदतें: कचरा प्रबंधन, ऊर्जा और जल संरक्षण जैसी आदतों को विकसित करना।
  • कौशल विकास: विद्यार्थियों में रचनात्मकता, नेतृत्व और समस्या-समाधान क्षमता विकसित करना।
  • 'मिशन लाइफ' को बढ़ावा देना: दैनिक जीवन में पर्यावरण-अनुकूल विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित करना। 
  • वृक्षारोपण: स्कूल और आसपास के क्षेत्रों में पौधे लगाना और उनकी देखभाल करना।
  • कचरा प्रबंधन: बेकार सामग्री (जैसे प्लास्टिक, कार्टन) से उपयोगी वस्तुएँ बनाना (जैसे झूला, गुलदस्ता)।
  • जल संरक्षण: वर्षा जल संचयन और जल स्रोतों के महत्व को समझना।
  • स्वच्छता अभियान: स्कूल परिसर और आसपास स्वच्छता बनाए रखना।
  • प्रतियोगिताएँ: पर्यावरण संबंधी कला, वाद-विवाद और अन्य प्रतियोगिताएँ आयोजित करना। 
  • अनिवार्य गठन: सभी प्राथमिक, मध्य, माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में अनिवार्य है।
  • फंडिंग और दिशानिर्देश: स्कूलों को फंड और गतिविधियों के संचालन के लिए दिशानिर्देश मिलते हैं।
  • ऑनलाइन रिपोर्टिंग: सभी गतिविधियों की जानकारी 'इको क्लब फॉर मिशन लाइफ' पोर्टल पर अपलोड की जाती है।
  • नोडल व्यक्ति: एक शिक्षक को नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाता है जो गतिविधियों का संचालन करता है। 
संक्षेप में, बिहार में इको क्लब बच्चों को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनाने और 'मिशन लाइफ' के तहत टिकाऊ जीवनशैली अपनाने के लिए सशक्त बनाने का एक महत्वपूर्ण मंच है, जो 'जल जीवन हरियाली' जैसे राज्यव्यापी मिशनों से भी जुड़ा है।